​​​​​​हाइपो -------- एक ख़तरे की घंटी (ज़रा सुन लें)

आप कहेंगे कि हाइप (Hype) करना तो खूब सुना है और रोज़ ही देखते हैं -- ख़ासकर​, बोलीवुड​, मीडिया और पोलिटिक्स में। पर अब​ यह हाइपो हाइपो क्या है यह हाइपो  हाइपो ? 

तेज़ धड़कता दिल, भागती नब्ज़​, पसीने छूटना, कँपकँपी छूटना, चक्कर आना, बेचैन भटकता उखड़ा उखड़ा मन​, कमज़ोरी, भूख​ महसूस होना, दिमाग में कुछ न सूझना! ऐसा कुछ हुआ है आपके साथ? आपने सोचा होगा कि इंटरनेट के ज़माने के इश्क़ के 1365 साईड ईफेक्टस में से कुछ के कारण है । या शायद​ तनाव बहुत ले रहा/रही हूँ आजकल​। नहीं तो जब देखो ख़ून पीने को ऊतारू उस दुश्मन​, बीवी/पति, बॅास/कोलीग, ​ बॅायफ्रेंड/गर्लफ्रेंड, ये फ्रेंड/वो फ्रेंड या फिर उस पनौती के कारण है जिसने जीना हराम कर रखा है!!!  पर​ ध्यान रहे……..यह सब हाइपो के  एपिसोड से गुज़रने के कारण भी हो सकता है। 

वैसे बिना डायबिटीज़ के लोगों को भी ऐसा महसूस हो सकता है पर हाइपो का संबंध विशेषकर डायबिटीज़ से ग्रस्त लोगों से है। दरअसल हाइपो यहाँ पर हाइपोग्लाइसीमिआ (Hypoglycaemia) का छोटा रूप है।

इन मेडिकल और वैग्यानिक शब्दों को पढ़कर ऐसा लगता है कि मानो ग़ालिब साहब ने इन्हीं के लिए कहा था--

"बस कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना"

लेकिन फिर भी यहाँ कोशिश करते हैं हाइपोग्लाइसीमिआ की दुश्वारी को आसानी से समझने की ---

हाइपो (सामान्य यानी Normal से कम​) + ग्लाइसीमिआ (खून​ में ग्लुकोस या शुगर का स्तर​)   =   हाइपोग्लाइसीमिआ

मतलब यह हुआ कि खून​(blood) में अगर शुगर (sugar) यानि ग्लुकोस (glucose) का स्तर अगर सामान्य (normal) से कम है तो यह हाइपोग्लाइसीमिआ है और यहाँ हम इसे और भी आसानी के लिए, बोलचाल की भाषा में, हाइपो के नाम से बुलाऐंगे।

स्कूल छोड़े अगर​  हमें बरसों हो भी ग​ए तब भी कभी कभी स्कूल की तरह कुछ सबक​ रट्टा मार कर रखने  में कुछ बुराई नहीं है, जैसे कि---


1)  90 mg/dL लगभग = सामान्य ब्लड शुगर स्तर (Normal Blood Sugar level)

2)  90-18 = 72mg/dL लगभग =  ख़तरे की घंटी क्योंकि इससे नीचे आपको हाइपो का शिकार माना जाता है   

3)  72-18 = 54mg/dL लगभग =  ख़तरे का लाल निशान पार​ और यह हाइपो की ख़तरनाक स्तिथि है


यहाँ समझने की ज़रूरत यह है कि अधिकतर इंसान और बीमारियाँ उपर उठ कर अपना रंग दिखाते हैं पर हाइपो जनाब तो नीचे और नीचे गिर कर अपना कमाल करते हैं1! अब कोई आपके इतने क़रीब हो और बात​-बात पर नीचे गिरने पर ऊतारू हो तो आपका उससे सावधान रहना तो बनता ही है। देखिए कैसे ये साहब ज़रा-ज़रा सी बात पर नीचे गिर सकते हैं-


A)    खाना देरी से खाने से-- अब माँ ऐसे ही तो नहीं डाँटती है, "चाहे जो भी हो खाना वक़्त से खा लेना !"

B)    खाना बहुत कम खाने से

C)    डायबिटीज़ की दवाईयाँ ज़रूरत से ज़्यादा लेने से

D)    शराब पीने से

E)    इंसुलिन लेते हैं तो कसरत के दौरान  भी ये हाइपो साहब गिर सकते हैं।  इसे कहते हैं इधर कूँआ ऊधर खाई !                   डायबिटीज़ में कसरत न करो तो परेशानी और कसरत करने पर ध्यान न रखने पर भी।  


और तो और क​ई बार यह हाइपो सोने के बाद भी पीछा नहीं छोड़ता है और ज़्यादतर यह होता है कि रात में इसके              चुपचाप आने का पता ही  नहीं चलता है। आपने वह पुराना गाना तो सुना होगा, "ओ खटमल धीरे से आना खटियन          में"!! इसे थोड़ा बदल कर गाकर देखते हैं, "ओ हाइपो मत आना  भैया खटियन में" । बड़ा ढीठ है! यह इससे भी                  नहीं जाने वाला!


हाइपो हो सकता है ख़तरे जान​--- लापरवाही न बरतें


कुछ लोगों के लिए टीवी पर सास​-बहू और नागिन के एपिसोड से गुज़रना जितना ख़तरनाक नहीं है  उससे भी कहीं बहुत ज़्यादा ख़तरनाक हो सकता है आपके लिए हाइपो के एपिसोड से गुज़रना। जानिये कैसे--

हाइपो गम्भीर होने या बिगड़ने की स्तिथि में न सिर्फ़ दौरे (seizure) पड़ सकते हैं बल्कि स्ट्रोक​, बेहोशी की नींद (Coma) और यहाँ तक कि जान के लाले भी पड़ सकते हैं।


इशारों इशारों में हाइपो बताने वाले--बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ से


आपका शरीर बिना बताए आने वाले मेहमानों के बारे में चाहे सावधान नहीं कर पाए लेकिन कुछ लक्षणों और संकेतों के द्वारा आने वाले हाइपो के एपिसोड​ के बारे में अवश्य सावधान करता है। आपने अगर इन इशारों पर ध्यान नहीं दिया तो क्या होगा ?--- रूठ कर, इशारे करने वाला शरीर ऐसा करना बंद कर देगा और फिर हाइपो कब आया आपको पता भी नहीं चलेगा। कोई इशारों इशारों में आपको दिल देने की कोशिश करे और आप उस हुनर पर ध्यान ही न दें तो कुछ ऐसा ही होता है ना !!


हाइपो की चीर​-फाड़ और उपचार ​


शक्कर आपको अच्छी लग सकती है लेकिन आपका मस्तिष्क या दिमाग लगभग पूरी तरह से शुगर​ का ग़ुलाम है और आपके भोजन में मौजूद अपने ज़रूरत की शुगर​ लेता रहता है। इसलिए अगर ब्लड में शुगर का स्तर कम हो जाए तो मस्तिष्क साहब सुस्त​ होकर​ अपना काम​-काज ढीला कर देते हैं। इधर​ हाइपो होते ही इस का सामना करने के लिए शरीर के अंदर के संबंधित​ यंत्र-तंत्र  सिपाही कमर कस लेते और हाइपो को पटखनी खिलाने के लिए इंसुलिन छोड़ना कम कर देते हैं और ग्लुकगन (Glucagon) छोड़ना बढ़ा देते हैं। ग्लुकगन एक तरह का हारमोन है जो खून में ग्लुकोस​ की मात्रा बढ़ा देता है।

आप सोच रहे होंगे की हाइपो में करें क्या ? सीधी सी बात है शुगर का स्तर अगर कम हो गया है तो शुगर का स्तर बढ़ा दें। बुज़ुर्गों से आपने सुना होगा कि ज़हर को ज़हर काटता है और हाइपो में कुछ ऐसा ही है। डायबिटीज़ में सभी आपको मीठे से बचने की सलाह देते हैं लेकिन हाइपो का इलाज कुछ मीठा (ग्लुकोस) खाना ही है। आप कहेंगे कि यह तो बड़ी मज़ेदार चीज़ है!  ध्यान रहे ! -- इतनी मज़ेदार भी नहीं है क्योंकि ज़हर उतना ही और तब ही लेना ठीक है जब​ कि वह​ दवा का काम करे!!!

अगर हाइपो बहुत​ बिगड़ गया है यानि आपका ब्लड ग्लुकोस <54mg/dl है,  तो किसी परिवार के सदस्य या देखभाल करने व्यक्ति के लिए आवश्यक है कि वह आपको ग्लुकगन (Glucagon) का इंजेक्शन दे। अगर स्तिथि नहीं सुधरती है तो आपको अस्पताल लेकर जाना प​ड़ेगा।


थोड़ा हम बताई दिये----ज़्यादा आप जान लो....


अब तक आप यह तो अच्छी तरह से समझ ग​ए हैं कि हाइपो सिर्फ़ एक ख़तरे की घंटी ही नहीं ख़तरे जान भी है। इस बला को अपने पास फटकने से दूर रखने का एक ही तरीक़ा है और वह यह है कि हम अच्छी तरह​ समझ लें कि किन कारणों से शुगर स्तर नीचे आता है।  


आप मानेंगे कि हाइपो को भी थोड़ा हाइप (Hype) करने में कुछ बुराई नहीं है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों में इसके बारे में जागरूकता पैदा हो सके। उपर आपको ग़ालिब साहब के शेर की एक ही लाइन बताई थी, दूसरी भी बताकर शेर पूरा कर देते हैं .....

"आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना"

अगर हम अपनी पृथ्वी, देश​, पर्यावरण, और माहौल के साथ ख़ुद को और अपनी सेहत को बेहतर बनाने में लग जाएँ तो शायद आदमी को भी इंसाँ होना मयस्सर हो जाए।


                                                                                                                ---ऐ... जस​                



​डिस्क्लेमर​: ऊपर दी गई जानकारी मेरे सामान्य ग्यान पर आधारित है जो मैंने इधर-उधर से पढ़कर प्राप्त किया है। लेकिन मैं कोई डॅाक्टर या विशेषग्य नहीं हूँ। अपनी मेडिकल स्तिथि के लिए उपयुक्त​  डॅाक्टर या विशेषग्य से राय लें।यहाँ सिर्फ़ मज़ाकिया ढंग से इस​ विषय के बारे में मामूली जानकारी देने का प्रयास किया गया है।